Sex with office girl

दोस्तो मैं कोटा, राजस्थान में एक प्राईवेट कम्पनी में 4 साल से काम कर रहा हूँ.
कोटा जैसे स्मार्ट सिटी में हर साल लाखों लड़के लड़कियां आई.आई.टी. जेईई के एक्जाम की तैयारी के लिए अपनी किस्मत आजमाने आते हैं.

मैं जिस कम्पनी में काम करता हूँ. उस कम्पनी का सारा स्टाफ मुझे बहुत पसंद करता है क्योंकि मैं सबकी मदद भी करता हूँ और देखने में भी मैं बहुत स्मार्ट हूँ.
मेरा कद 5 फुट 9 इंच का है और रंग एकदम गोरा है.
मेरी बॉडी भी इतनी अच्छी है कि कोई भी लड़की एक बार तो मंत्रमुग्ध हो ही जाएगी.

ये ऑफिस Xxx स्टोरी आज से दो साल पहले की है.

मेरे ऑफिस में अलवीना नाम की लड़की आई.
अलवीना के बारे में आप लोगों को सीधे तौर पर बताऊं … तो अलवीना एक नम्बर की माल लौंडिया थी. उसके बड़े बड़े मम्मों को हथेलियों से पूरा भर पाना बहुत मुश्किल काम था. वो 5 फीट के कद वाली एक डीजल माल थी.
डीजल माल मैं उस लौंडिया को कहता हूँ जो कद में नाटी हो और भरे हुए शरीर की हो.

अलवीना ज्यादातर सलवार सूट पहनती थी.

ऑफिस के काम के बारे में उसे ज्यादा जानकारी नहीं थी, तो मैंने उसकी काफी मदद की. मैं तो वैसे ही सबकी मदद करने वाला बंदा था. मैंने अलवीना को भी एक दोस्त की तरह माना और उसकी हर काम में उसकी बहुत मदद की.

उसे एक बार तो मैंने एक कानूनी पेंच में फंसने से भी बचाया.
वो मेरी इस बात से बड़ी खुश थी.

लेकिन मैं इस बात से बिल्कुल अंजान था कि वो मुझ पर इस तरह फिदा हो चुकी है कि वो कैसे भी करके मुझे पाना चाहेगी.

फिर एक दिन जब ऑफिस में हमारे बॉस नहीं थे, तो अलवीना मेरे पास आ गई.

अलवीना मेरी टेबल पर अपनी कोहनियों को टिकाते हुए मुझे देखने लगी और बोली- यार, मैं आपका एहसान कैसे चुकाऊं … मेरे लिए तो आपने मेरी रोजी रोटी सब कुछ बचाई है.
मैंने कहा- अरे मैडम … आप मुझे क्यों शर्मिंदा कर रही हो.

पर उसकी आंखों में आंखें डालने पर मुझे सच में कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया.

मैंने कहा- मैडम आप तो सैंटी हो गई हो. मैंने आप पर कोई एहसान नहीं किया है. मैंने जो भी किया अपनी कम्पनी की छवि बचाने और एक दोस्त का फर्ज निभाने के लिए ही किया है.

लेकिन मेरी तमाम दलीलों के बावजूद भी अलवीना नहीं मानी. वो लगातार मेरी तारीफ पर तारीफ करती ही रही और मुझसे कोई भी ऐसा काम करने के लिए बोलती रही, जिससे वो मेरे अहसान से मुक्त हो सके.

आखिर मैंने उससे कहा- ओके अगर तुम मेरे एहसान का बदला चुकाना ही चाहती हो तो बस तुम मुझे एक ड्रिंक पिला देना.

ऑफिस में सभी को मालूम था कि मैं बहुत बड़ा दारूखोर हूँ. मैंने पहले भी अलवीना से इस तरह की बात की थी … जो कि मेरे लिए बिल्कुल आम बात थी.

मैंने कभी कभी ऑफिस में भी ड्रिंक ली थी, जिसके बारे में अलवीना को पता था, लेकिन उसने कभी किसी से नहीं कहा था.

अलवीना ने थोड़ी देर में मुझसे कहा- ठीक है दोस्त, मैंने तुमसे वादा किया है … तो मैं अपना ये वादा जरूर निभाउंगी.

फिर शनिवार के दिन उसने मुझे फ़ोन किया और मेरे साथ बैठ कर पीने की इच्छा जताई.

मुझे अकसर ऑफिस में देरी हो जाने के कारण में घर पहुंचने में कई बार देरी हो जाती थी. लेकिन उस दिन मेरे पास कोई ज्यादा काम नहीं था. मैं जल्दी घर जाकर मस्ती से इस शनिवार का मजा लेना चाहता था. मगर आज अलवीना ने बोला तो मैंने हामी भर दी.

अलवीना ने कहा- अगर तुम चाहो तो हम दोनों किसी बार में ड्रिंक करने चल सकते हैं.

लेकिन ऑफिस से बार काफी दूर होने के कारण मैंने अलवीना को मेरे साथ ऑफिस में ही ड्रिंक करने का प्रस्ताव दिया.
जिसे उसने मेरे कहने पर तुरन्त मान लिया.

हालांकि ऑफिस में ही ड्रिंक लेने की उसकी हामी भर देना मुझे थोड़ा अजीब सा लगा.
मैंने उससे ऑफिस में ड्रिंक लेने की बात केवल टालने के लिए कही थी.
मगर वो एकदम से मान गई थी.

आम तौर पर कोई भी लड़की अपने वर्क स्पेस में इस तरह इतनी जल्दी पीने के लिए नहीं मानती.
लेकिन अलवीना ने झट से दारू पीने की बात मान ली थी.

मैंने उसकी आंखों में देखा, तो वो बड़ी लालसा से मेरी तरफ देख रही थी.
मैं उसकी आंखों को देख कर अब भी ये न समझ सका था कि अलवीना क्या चाहती है.

शाम को जैसे ही 06.00 बजे, तो उसका मैसेज आ गया कि जाओ ड्रिंक ले आओ, मैं पे कर दूंगी.

उसकी बात सुनकर मैं पास की वाइन शॉप से एक बोतल और ग्लास, स्नैक्स वगैरह ले आया.

जब ऑफिस से सब चले गए … तो मैंने अलवीना को सामान के साथ ऑफिस के रेस्टहाउस वाले रूम में आने को कह दिया.

थोड़ी देर में मैं भी उसी रूम में चला गया और गेट का लॉक लगा दिया.

हम दोनों आमने सामने बैठ गए और बोतल खुल गई.
मैंने पैग बनाए और हम दोनों ने जाम टकरा कर पीना चालू कर दिया.

हम दोनों दारू के गिलासों को होंठों से लगाए हुए धीरे धीरे सिप लेते हुए एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे.
मैं उसकी तारीफ़ कर रहा था और वो मेरी.
हम दोनों एक दूसरे की खूबसूरती की तारीफ करते हुए दारू का मजा ले रहे थे.

अलवीना धीरे धीरे पी रही थी.
उसके दो पैग हुए थे और मैं चार पैग गटक चुका था.
मैं तो पीने का आदी हो गया हूँ.

हम दोनों फुल मस्ती में थे और आपस में हंसी मजाक कर रहे थे.

मुझे शराब जल्दी असर नहीं करती है. मगर ये सीन अलवीना के साथ नहीं था. उसे शराब का नशा चढ़ गया था.

और तभी पता नहीं उसको क्या हुआ, वह अपनी सीट से उठ कर मेरी गोद में आकर कुछ इस तरह से बैठ गई कि उसके दोनों स्तन मेरे सीने को छूने लगे थे.

पता नहीं मुझे क्यों ऐसा लगा कि अलवीना मुझसे चुदने के मूड में आ गई है.
मैंने अलवीना को खींच पर उसके गुलाबी होंठों पर किस कर लिया.

अलवीना ने भी मेरा साथ दिया, तो हम दोनों चूमा चाटी में लग गए. कुछ पल बाद मैंने उसको अपनी बांहों में जकड़ कर उसको उठा लिया.
वो भी मेरी कमर से अपने दोनों पैर बांध कर लटक गई.

मैंने उसे सामने की टेबल पर बिठाया और उसका कुर्ता खींच कर एक झटके में उतार दिया.

मैं पहली बार इतना वाईल्ड हुआ था. पता नहीं … उस दिन मुझे कुछ ज्यादा नशा हो गया था.
फिर अलवीना की तरफ से तो पहले से ही मुझे खुला आमंत्रण था.

उसका कुर्ता उतरते ही मेरे सामने एक गुलाबी ब्रा में कसे उसके मम्मे मुझे दीवाना बनाने लगे.
मैंने उसकी ब्रा खोल दी और उसके मम्मों को पीना और काटना शुरू कर दिया.

मैं कुछ ज्यादा ही तेजी से उसके मम्मों को काटता हुआ चूस रहा था.
उसे दर्द ही रहा था मगर तब भी अलवीना ने चुपचाप सब कुछ होने दिया.

अलवीना नशे में इस दर्द को भी एन्जॉय कर रही थी. उसे भी अच्छा लगने लगा था.
अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था. फिर भी मैं उसको मीठा दर्द दिए जा रहा था.

अब मैंने उसका हाथ अपने औजार पर रख दिया.
उसको भी मेरे लंड को पकड़ने का मन था. उसने भी लंड को सहलाया और धीरे से नीचे झुक कर मेरी पैंट खोलकर लंड बाहर निकाल लिया.

वो मेरी आंखों में वासना से देखने लगी तो मैंने उसे हल्का से इशारा किया. वो समझ गई और झुक कर लौड़े को चूसने लगी.

आह … एक तरफ तो दारू का नशा और दूसरी तरफ अलवीना की जवानी मेरे लंड को चूस रही थी.
मैंने अपनी शर्ट उतार दी और पूरा नंगा होकर मजा लेने लगा.

कुछ ही समय बाद मैं कमरे के फर्श पर ही लेट गया और नशे में लंड चुसाई का मजा लेने लगा.
मेरी आंखें मस्ती में बंद हो गई थीं और मैं कुछ बेहोश सा हो गया था.

कुछ देर बाद लंड चुसाई का अहसास खत्म हुआ और कुछ अलग सी गर्मी मिली.
तो मैंने आंखें खोल कर देखा कि अलवीना पूरी तरह से नंगी होकर मेरे लंड को अपनी चुत में लेकर मेरे ऊपर बैठने की कोशिश कर रही थी.
वो नशे में थी और उसकी चुत में लंड घुस नहीं रहा था.

मैंने हाथ से लंड को सैट किया और वो मेरे लौड़े पर चुत पेलती हुई धच्छ से बैठ गई.
लंड चुत के रगड़ से हम दोनों के मुँह से आह निकल गई.

एक दो बार ऊपर नीचे होकर अलवीना ने पूरा लंड चुत में ले लिया था और अब वो जोरों से मेरा लंड चुत की जड़ तक ले रही थी.

मुझे बहुत मजा आने लगा तो मैंने भी अलवीना को पकड़ कर उसकी धकापेल चुदाई चालू कर दी.

कुछ देर बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया.
वो गांड में लंड लेकर एकदम से बिलबिला उठी. मगर मैंने पूरा लौड़ा गांड में अन्दर तक पेल दिया.
वो पहले भी गांड मरा चुकी होगी, इसलिए उसको जल्दी ही मजा आने लगा था.

अब मैं उसको कुत्ते की तरह जोर जोर से चोदने लगा. वो भी कुतिया सी बिलबिलाती हुई लंड अन्दर ले रही थी.

अलवीना को भी मजा आने लगा. वो बोली- क्या यार पीछे भी पेल दिया … मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं आपके साथ पहली बार में ही इतना ओपनली सेक्स करवा लूंगी.
मैंने भी लंड पेलते हुए कहा- अब बस चुदने का मजा ले लो अलवीना रानी.

ये कहकर मैंने अपने झटके और तेज कर दिए और अलवीना मस्ती में चिल्ला चिल्ला कर मेरा लंड लेने लगी.

उस समय ऑफिस में हमारी मस्ती भरी आवाजों को सुनने वाला कोई नहीं था.

दस मिनट बाद वो मुझसे छोड़ने को कहने लगी, लेकिन अब मेरे ऊपर एक दूसरा नशा चढ़ गया था और वो था अलवीना की चुदाई का नशा.

चुदाई के बाद हम दोनों स्खलित हो गए थे.
नशे में होने के कारण अलवीना और मैं वहीं उसी नंगी हालत में फर्श पर पड़े कालीन पर ही सो गए.

जब सुबह मेरी नींद गहरी लगी हुई थी तो मेरे पास नंगी पड़ी अलवीना ने मेरे सीने पर किस किया और मुझको हिलाते हुए जगाया.

मैं जागा … तो उसने कहा- उठो यार, सुबह के 4 बज गए हैं और अब हमें अपने कपड़े पहन कर घर चलना चाहिए.

मैं उठा और जल्दी से अपने कपड़े पहने.
फिर हम दोनों चलने को रेडी हो गए.

मैंने गार्ड को फोन करके ऑफिस का गेट खोलने को कहा.
मेरी पीने की आदत के बारे में तो गार्ड पहले से ही जानता था, लेकिन अलवीना को देख कर उसके मन में भी मस्ती जाग गई.

उसने मेरी ओर देखा और स्माईल पास की.
मैंने उसकी भावना को समझ कर उसको 100 का नोट देकर सारे सबूत मिटाने को कहा.

उसने ‘जी सर ..’ कह कर अपना काम चालू कर दिया और मैं और अलवीना अपने अपने घर को एक साथ रवाना हो गए.

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